बॉलीवुड में ड्रग्स के सवाल पर अभिनेता पंकज त्रिपाठी बोले:किसी भी क्षेत्र के बारे में जनरल मानसिकता नहीं होनी चाहिए

 जैसे-जैसे कोरोना कंट्रोल हुआ है, सिनेमा हाल खुले हैं। - Dainik Bhaskar

अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपनी शानदार अदाकारी से बॉलीवुड में स्थान बनाया है। पंकज इन दिनों उज्जैन में फिल्म ओह माय गॉड-2 की शूटिंग कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में पंकज ने बताया शहर की अलग- अलग लोकेशन पर एक हफ्ते तक शूटिंग चलेगी। यह फिल्म नए साल में रिलीज हो सकती है। अक्षय कुमार, यामी गौतम, गोविंद नामदेव के अलावा और भी कलाकार फिल्म में हैं। फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर, मिर्जापुर, मसान ने उन्हें बुलंदियों पर पहुंचा दिया लेकिन पंकज ने अपनी सहजता और विनम्रता को बनाए रखा। पेश है उनसे चर्चा के कुछ अंश-

बॉलीवुड ड्रग्स, गांजा और कई तरह के नशे के लिए बदनाम है, इस पर क्या कहना है? किसी भी उद्योग व क्षेत्र के बारे में जनरल मानसिकता नहीं होनी चाहिए कि वह अच्छा है या बुरा। हर क्षेत्र में हर तरह के लोग होते हैं, सभी को एक नजरिए से नहीं देखना चाहिए। ओह माय गाॅड को लेकर पहले विवाद भी सामने आया था, क्या इस बार भी शूटिंग के दौरान कोई विरोध सामने आया? अभी तो फिल्म की शूटिंग चल रही है लेकिन ऐसा कोई विवाद मुझे सुनने में नहीं आया है। फिल्म की कहानी के हिसाब से कुछ सीन थे, जिसकी शूटिंग के लिए उज्जैन का चयन किया गया। अगले सात दिनों तक उज्जैन में ही शूटिंग चलेगी। उज्जैन शूटिंग के लिहाज से बहुत सुंदर स्थान है। फिल्म में आपकी क्या भूमिका है? मुस्कुराते हुए बोले-यह अभी नहीं बता सकते लेकिन शानदार भूमिका देखने को मिलेगी। फिल्म शूटिंग के लिहाज से उज्जैन कितना परफैक्ट है? आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद आया? मैं उज्जैन पहली बार आया हूं, मुझे यहां बहुत सुकून मिला, सबसे पहले मैंने शिप्रा में डुबकी लगाई, इसके बाद महाकाल के दर्शन किए और फिर शूटिंग शुरू की। यहां बहुत अच्छे लोग हैं, लोग बहुत सहयोग कर रहे हैं। जिला प्रशासन का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। अभी दो दिन हुए हैं, शिप्रा के घाट और मंदिर के इलाके बहुत सुंदर हैं, अभी तो और भी अनुभव मिलेंगे। अक्षय कुमार सुबह से शूटिंग में जुट जाते हैं, उनके साथ शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? हम सभी सुबह उठने वाले लोग हैं, सुबह पांच बजे उठकर 6 बजे शूटिंग पर निकल जाते हैं। इसके बाद दिनभर शूटिंग में व्यस्त रहते हैं। कोई ऐसा रोल जो आपका सपना हो? नहीं मेरा ऐसा कोई सपना नहीं है, मैं सभी तरह के रोल करता हूं। मैं बहुत ऑर्गेनिक आदमी हूं, बिल्कुल नदी की तरह, जो रोल करना है, उसे ईमानदारी से करता हूं। मेरी रूचि अगल तरह के सिनेमा की है। मुझे घूमना, खाना, संगीत, लिखना, पढ़ना बहुत पसंद है। संघर्ष के कितने साल बाद आपको लगा कि अब में स्टार बन गया हूं? ऐसा मुझे कभी नहीं लगा, मैं आज भी वही पंकज हूं। अब ज्यादा लोग जानने लगे हैं, लोगों का अथाह प्यार मिलने लगा है। यह मुझे विनम्र बनाता है। क्या आपके पुराने दोस्त, स्कूल के साथी आपको फोन करते हैं? कोई खास फ्रेंड जिसका जिक्र करना चाहते हो? सभी से बात होती रहती है। हर तीन महीने में गांव जाता हूं। मेरे मां-पिता गांव में रहते हैं, उन्हें शहर पसंद नहीं है। इसलिए मैं उनसे मिलने चला जाता हूं। कोरोना की वजह से कई फिल्में नहीं चल पाई, अब इंडस्ट्री में फिर से उछाल आया है, आप इसे किस तरह देख रहे हैं? जैसे-जैसे कोरोना कंट्रोल हुआ है, सिनेमा हाल खुले हैं। सभी के लिए मुश्किल दौर था लेकिन अब सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। छह -सात महीने में मेरी 6-7 फिल्में आएंगी।

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