सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट भाजपा-कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बन गई है। भाजपा की प्रतिमा बागरी के समर्थन में सीएम शिवराज सिंह चौहान भी 6 दौरे कर चुके हैं। वहीं, कांग्रेस की कल्पना वर्मा के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ 3 दौरे कर चुके हैं।
भाजपा जहां विकास और कांग्रेस की नाकामियों को गिना रही है, वहीं, कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी और खाद संकट को जनता के सामने रख रही है। चुनाव नजदीक आते ही जातियों को साधने की कोशिश जारी है। दोनों ही पार्टी विशेष जाति बाहुल्य इलाकों में उसी से जुड़े नेताओं की सभा करवा कर वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट रैगांव के हर चुनाव में सवर्ण मतदाताओं के हाथ में सत्ता की चाबी होती है। हालांकि, हरिजन-आदिवासी मतदाता भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
पढ़िए रैगांव से ग्राउंड रिपोर्ट...
रैगांव सीट के कोड़ार गांव में लक्ष्यपति बागरी चबूतरे पर बैठे मिले। उन्होंने बताया कि गांव का मतदाता सााइलेंट है। जिन्हें योजना का लाभ मिला है, वह बखान कर रहा है और जिन्हे नहीं मिला, वह बुराई कर रहे हैं। इसी जगह सरकारी कर्मचारी भी मिल गए। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि योजना का पैसा ऊपर से आता है। गांव तक अभी भी नहीं पहुंच रहा। गरीब वर्ग परेशान है। कोई सुनने वाला नहीं। बाहरी नेता गांव से गुजरते हैं। स्थानीय नेता मतदाताओं के पास आने से डरते हैं।
किसानों को नहीं मिल रहा खाद
थोड़ा आगे हिलौंधा गांव पहुंचे। यहां रामजस मिश्रा मिले। वे कहते हैं कि किसान पैसे लेकर घूम रहे हैं। फिर भी खाद नहीं मिल रहा। जनता महंगाई से त्रस्त है। गांव का हर वर्ग परेशान है। न किसी को वृद्धा पेंशन मिल रही और न राशन कार्ड बना है। गांव की ही चिंता देवी ने कहा कि दिनभर बीड़ी बनाने का 50 रुपए मिलता है। महंगाई में 50 रुपए से कैसे घर चल सकता है। घर की महिलाएं ज्यादा परेशान हैं। फिर दाल रोटी वाला दौर आ गया है। गैस सिलेंडर तो सपने में भी नहीं सोच सकते।
बसुधा गांव के रहने वाले पूर्व मंत्री व 5 बार के विधायक जुगल किशोर बागरी के निधन पर उपचुनाव हो रहा है। यहां बउली टोला के वीरेन्द्र सिंह उर्फ वैद्य बब्बा मिले। उन्होंने कहा कि सवर्ण वोटर जिधर गए, वही दल जीतता है। हालांकि, क्षत्रिय समाज के दो गुट हैं। एक गुट कांग्रेस और दूसरा भाजपा में है। 2013 के चुनाव में बसुधा से ही भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार थे। ऐसे में दोनों ओर वोट डायवर्ट होते हैं। पिछले चुनावों तक बागरी के साथ ही ब्राह्मण और कुछ क्षत्रिय मतदाता रहता था।
लोकसभा चुनाव में हरिजन और आदिवासी वोट मिलने के दावे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में कांग्रेस को हरिजन, कुशवाहा और क्षत्रिय वोट थोक में मिला था, लेकिन इस बार आदिवासी सहित अन्य जातिया जिधर जाएंगी, उसी का पलड़ा भारी रहेगा।
हिलौंधा के आक्रोशित ग्रामीण बोले- नोटा को देंगे वोट
दो दर्जन गांवों में पहुंचने के बाद रैगांव विधानसभा का सबसे समस्या ग्रस्त गांव हिलौंधा मिला। यहां के एक दर्जन ग्रामीण सहित जीतेन्द्र मिश्रा दोनों ही दलों पर बरस पड़े। कहा- शायद हिलौंधा ही जिले का ऐसा गांव होगा, जहां लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यही मार्ग बसुधा जाता है, पर किसी ने समस्या नहीं सुनी। लोग राशन कार्ड, केरोसिन, बीपीएल कार्ड, उज्जवला और पीएम आवास के लिए तरस रहे हैं। परेशान लोग गांव में अधियां, ठास की खेती करते हैं। वहीं, ज्यादातर लोग बाहर जाकर मजदूरी कर जीवन बसर कर रहे हैं।
10 साल से खुदा शौचालय का गड्ढा
सुनीता रजक ने कहा कि हिलौंदा में 10 साल से शौचालय का गड्ढा खुदा है। सरपंच-सचिव पैसे निकालकर डकार गए। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। 80% लोग खुले में शौच कर रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। यहां कोई भी विधायक बने जीतकर उसको सतना या फिर नागौद में शिफ्ट हो जाना है। अभी गांव की सड़कों पर वाहनों का काफिला दिखता है। चार दिन बाद कोई यहां मुड़कर नहीं देखेगा।
दोनों दल जातियों को इस तरह साध रहे
भाजपा- सेमरवारा में सबसे ज्यादा ठाकुर जाति के हैं। यहां की जिम्मेदारी खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को दी गई है। यहां दो दिवसीय दौरे पर नरेंद्र सिंह तोमर भी आए थे। पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला ब्राह्मणों को साध रहे हैं। वहीं, सिंगरौली जिले के विधायक सुभाष वर्मा भी एससी-एसटी को साधे हुए हैं। सभी नेता यहां काफी समय से डेरा डाले हैं।
कांग्रेस- यहां पार्टी दमोह फॉर्मूला अपना रही है। पार्टी की उम्मीदवार कल्पना वर्मा के समर्थन में ठाकुरों को साधने के लिए यहां अजय सिंह एक महीने डेरा डाले हैं। कुशवाह वोट बैंक को साधने की जिम्मेदारी सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाह को दी गई है। ब्राह्मणों को साधने के लिए नीलांशु चतुर्वेदी चित्रकूट विधायक को जिम्मेदारी दी गई है। श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी को भी लाया गया। वहीं, दमोह विधायक अजय टंडन को भी लगाया गया है। हरिजन-आदिवासियों को साधने के लिए पूर्व विधायक ऊषा चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है।
भाजपा इन मुद्दों पर मांग रही वोट
- केन्द्र सरकार की योजनाओं का बखान
- प्रदेश सरकार की लाभकारी योजनाएं
- संबल योजना
- गरीब बच्चों को कक्षा एक से लेकर हायर एजुकेशन तक का खर्चा
- कांग्रेस की 15 माह में नाकामी
- घर घर शौचालय
- गरीबों को मकान
- गरीबों को गैस सिलेंडर
- क्षेत्र के विकास के दावे
- बरगी का जल्द आएगा पानी
कांग्रेस ने इन मुद्दों को बनाया आधार
- भाजपा पर सरकार गिराने का आरोप
- किसान कर्जमाफी
- वृद्धा पेंशन डबल
- लाड़ली लक्ष्मी योजना की राशि डबल
- फसलों के उचित दाम नहीं
- खाद के लिए लगी लाइन
- व्यापारी परेशान
- बेरोजगार हताश
- महंगाई आसमान पर
- पेट्रोल डीजल 100 के पार
रैगांव विधानसभा अब तक के विधायक
चुनाव विजेता जीतने वाला प्रत्याशी हारने वाला प्रत्याशी
-1977 जनता पार्टी विश्वेश्वर रामाश्रय प्रसाद (कांग्रेस)
-1980 कांग्रेस रामाश्रय प्रसाद जुगल किशोर बागरी (बीजेपी)
-1985 कांग्रेस रामश्रे प्रसाद जुगल किशोर बागरी (बीजेपी)
- 1990 जनतादल धीरेंद्र सिंह जुगल किशोर बागरी (बीजेपी)
- 1993 बीजेपी जुगल किशोर बागरी राम बहरी (बसपा)
- 1998 बीजेपी जुगल किशोर बागरी उषा चौधरी (बसपा)
- 2003 बीजेपी जुगल किशोर बागरी उषा चौधरी (बसपा)
- 2008 बीजेपी जुगल किशोर बागरी उषा चौधरी (बसपा)
- 2013 बसपा ऊषा चौधरी पुष्पराज बागरी (बीजेपी)
-2018 बीजेपी जुगल किशोर बागरी कल्पना वर्मा (कांग्रेस)खबरें और भी हैं...




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