कोरोना, टीबी, कैंसर, डायबिटीज, श्वसन और लिवर संबंधी बीमारियों की जांच अब सांस से हो सकेगी। इस तरह की जांच में किसी भी तरह के सैंपल की जरूरत नहीं होगी। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि (आरजीपीवी) के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस ने इस किट को तैयार करने की रिसर्च करीब डेढ़ साल में पूरी की है। अब इसे पेटेंट कराया जाएगा।
यहां के दो फैकल्टी और दो स्टूडेंट ने जो किट तैयार की है, उसे वीओसी (वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड) कहा जाता है। यह एक प्रकार का ब्रीथ एनलाइजर है, जो सांस में उपलब्ध कपाउंड का विश्लेषण कर रिजल्ट देता है। यह सस्ता होने के साथ ही तत्काल रिजल्ट भी दे देता है।
खासियत... किसी भी तरह के सैंपल यानी ब्लड, स्वॉब की जरूरत नहीं
वीओसी की खासियत यह है कि इसके माध्यम से जांच के लिए किसी तरह के सैंपल जैसे ब्लड, स्वॉब आदि की जरूरत नहीं होगी। इसे सीधे संबंधित व्यक्ति के मुंह पर लगाया जाएगा और उसकी सांस इसमें ली जाएगी। इसके बाद उसके कंपोनेंट के पैटर्न आधार पर यह रिजल्ट देगा। यह एक प्रकार का डायग्नोस्टिक टूल रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक इस टूल में सेंसर भी हैं।
150 से ज्यादा की कर चुके जांच
इस वीओसी किट से अब तक 150 से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है। इसमें टीबी की पुष्टि भी हुई है। इसके लिए रिसर्च करने वालों में विभाग की एचओडी डॉ. दीप्ति जैन, डॉ. रामसिंह बिश्नाेई और एम फार्मा की स्टूडेंट वर्षा पांडेय व भावेश्वरी वाघ शामिल हैं।
सिर्फ एक बार होता है उपयोग
डायग्नोस्टिक टूल की किट डिस्पोजेबल है। यह केवल एक बार के उपयोग के लिए है। इसे तैयार करने वाले सदस्यों ने बताया कि एक बार जांच में करीब 50 रुपए की लागत आएगी। अगर बल्क में जांच होगी तो यह और सस्ती भी हो सकती है। यह बहुत कारगर साबित हुई।
यह बेहद सस्ती टूल है- किट में सेंसर लगाए गए हैं, जल्द ही इसे पेटेंट कराएंगे
वीओसी बेहद सस्ती डायग्नोस्टिक टूल है। इसके माध्यम से कोरोना, टीबी के अलावा अन्य बीमारियों की जांच की जा सकती है। यह तुरंत परिणाम भी देती है। इसमें सेंसर लगाए गए हैं। इसे पेटेंट के लिए भेजा जा रहा है।
-डॉ. दीप्ति जैन, एचओडी, स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस



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